आज भी बेखबर रहती हो मैं बेकरार रहता हूं तुम्हारे दीदार को दिल के इरादों का कई बार कोशिश किया कि इजहार हो जाए
जीना चाहता हूं तुम्हारे प्यार के साए में बस इतना सा रहम करना कभी अपने से मुझको अलग मत होने देना तुम्हारी नशीली आंखों को देखकर हर जाम की ख्वाहिश पूरी हो जाती है अब मयखाने को जाने की जरूरत नहीं है
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