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जीना चाहता हूं

जीना चाहता हूं तुम्हारे प्यार के साए में बस इतना सा रहम करना कभी अपने से मुझको अलग मत होने देना

तुम्हारी नशीली आंखों को देखकर हर जाम की ख्वाहिश पूरी हो जाती है अब मयखाने को जाने की जरूरत नहीं है

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आज भी बेखबर रहती हो

आज भी बेखबर रहती हो मैं बेकरार रहता हूं तुम्हारे दीदार को दिल के इरादों का कई बार कोशिश किया कि इजहार हो जाए  जो वक्त रहते आपका सहारा मिल गया मेरे कश्ती को किनारा मिल गया